Fropper.com - no one's a stranger
Already a member? Login here  | Tour | Help  
in


Love IS Life



Mar 03, '09




लखीमपुर खीरी की साउथ फारेस्ट डिविजन की भीरा रेंज में पिछले दो माह से आतंक का पर्याय बन चुके बाघ को 01.03.2009 की शाम को टैंकुलाईजर करके पिंजडे में कैद कर लिया गाया है. इस बाघ को चार मानव हत्ताये करने के जुर्म में मुख्य वन सरछक वन्यजीव वीके पट्नायक द्वारा मौत की सजा दी गई थी. इसके तहत चलाए गए मिशन टाइगर के तहत आज सुबह जब बाघ ने एक पड्डे का शिकार करके खाया ओर चला गाया इसके बाद की गई नाकाबंदी का परिनाम यह निकाला कि शाम को वह जब दूसरी बार मांस खाने आया तो पहले से घात लगाकर बैठे ड्ब्ल्यूटीआई के एक्सपर्ट डा अनजान तालुकेदार ने उसे टैंकुलाईजर गान से बेहोश कर दिया. इससे बाघ को मिलीं मौत की सजा उम्रकैद में बदल गई है. इस सफलता पर वन्यजीव प्रेमियों ने खुशी का इज़हार किया है. जबकि ग्रामीणों ने भी राहत की साँस ली है. 
चैनल: Blog, दुधवा दर्शनटैग्स: विविध डीपी मिश्रा








Mar 03, '09



इसे यूपी का दुर्भाग्य कहा जाए या फिर वन विभाग के अफसरों की नाकाबिलियत का नमूना माना जाए कि वह तीन माह में यह पता नहीं पाए कि पीलीभीत से फ़ैज़ाबाद तक घूमने वाला बाघ नर है या मादा ? इसका खुलाशा हुआ है 25.02.2009 को बरेली के आई.बी.आर.आई. में पोस्टमार्टम के दौरान कि फ़ैज़ाबाद में 24.02.2009 को शिकारी नवाब की गोली से मारा गया आदमखोर बाघ नहीं वरन बाघिन थी.
उल्लेखनीय है माह नवंबर 2008 के प्रथम सप्ताह पीलीभीत के जंगल से निकाला बाघ साउथ खीरी के जंगल के साथ शाहजहांपुर से होता हुआ सीतापुर्, बाराबंकी फिर लखनऊ और उसके बाद फ़ैज़ाबाद तक पहुँच गया. इस दौरान तमाम स्थानों से उसके पंजों के निशान मिलें उनके फुटप्रिंट तैयार करके उनका मिलान भी किया गया.
उधर मानव हत्तायाऑ का दोषी मानकर बाघ को आदमखोर घोषित किया गया. इससे पूर्व ओर बाद में चलाए गए मिशन टाइगर में यूपी बन महकमे के डी.एफ.ओ. पीलीभीत, साउथ-खीरी, सीतापुर्, लखनऊ, दुधवा, कतर्नियाघाट, फ़ैज़ाबाद डी. एफ. ओ. आदि तमाम छोटे बड़े अफसरों समेत सैकडॉ कर्मचारियों के साथ ही अवध प्रांत के मुख्य वन संरछ्क ने पंजो के निशानों को देखा ही साथ में यूपी में विभाग के सबसे बड़े अफसर प्रमुख
वन संरछक [वन्यजीव] ने भी शायद उन पंजो को देखा होगा. उसके बाद भी यह सभी आला अफसर यह पता नहीं लगा सके कि मौत की सजा से बचकर भाग रहा बाघ नर है मादा. ? यह सिथति आपने आप में ही दुर्भाग्यपूर्ण कहीं जाएगी. ..
फिलहाल बन विभाग के नाकाबिल ओर नकारा हो चुके बनाधिकारियो की कार्यशैली के कारण एक बाघ असमय कलकवलित हो गया है. वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि वन विभाग द्वारा अगर सार्थक प्रयास किए जाते तो शायद इस बाघ को लखनऊ पहुचने से पहले ही रोक कर टैंकुलाइजर कर पकड़ा जा सकता था या हांका लगाकर वापस भी किया जा सकता था. लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया गया ? यह आपने आप में ही बिचारणीय प्रश्न है. ओर
इसकी गहन जाँच की भी आवश्यकता है.
गौरतलब यह भी है कि आदमखोर बाघ को पकड़ने के किए चलाए गए टाईगर मिशन पर सरकार का करोडो रुपया खर्च को चुका है. वह भी अफसरों की नाकाबिकियत के कारण. इसकी उन अफसरों के रिकवरी होनी चाहिए साथ ही इस पूरे मामले की जाँच भी सी.बी.आई से होनी भी आवश्यक है. ताकि दोषी अफसरो को सजा मिल सके ताकि अफसर भी इससे सीख ले सके. ओर आगे कोई बाघ साज़िश का शिकार होकर मौत की सजा न पा सके.
बन विभाग के ही सूत्रो का कहना है कि पीलीभीत के जंगल से बाघ निकाला था इसकी रिपोर्टिंग भी हुई थी फिर यह बाघिन कैसे हो गई ? इसकी भी गहन जाँच की आवश्यकता है. अगर छानबीन हो जाए तो एक बहुत बड़ी साज़िश का खुलाशा हो सकता है इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है.
{लेखक स्वतंत्र पत्रकार एव वाइल्ड लाईफर है}




Tags: dpmishra





Feb 05, '09



पिछले पाँच वर्षों में 400 से अधिक बाघ लापता हो चुके
भारत में बाघों की संख्या आधी हुई
भारत सरकार ने बाघों की ताज़ा आंकड़े जारी किए हैं जिनके अनुसार बाघों की संख्या आधी हो गई है.

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण ऑथारिटी के सचिव राजेश गोपाल ने बताया,'' सन् 2002 के सर्वेक्षण में बाघों की संख्या 3500 आंकी गई थी लेकिन ताज़ा सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 1411 बाघ बचे हैं.''

हालांकि सरकार का कहना है कि पिछले आंकड़े सही नहीं थे.

राजेश गोपाल का कहना था कि इस बार बाघों की संख्या के लिए नया तरीका अपनाया गया. पिछली बार पैरों के निशान के आधार पर इनकी संख्या का निर्धारण किया गया था जिसमें चूक की गुजांइश थी.

उनका कहना था,'' अब बाघ केवल देश के 17 राज्यों में पाए जाते हैं और वे केवल बाघ संरक्षित क्षेत्रों में ही पाए जाते हैं.''

घटती संख्या पर चिंता

मध्य प्रदेश में इनकी संख्या सबसे अधिक 300 है. उत्तराखंड में 178, उत्तर प्रदेश में 109 और बिहार में 10 बाघ होने का अनुमान हैं.

इसी तरह आंध्र प्रदेश में 95, छत्तीसगढ़ में 26, महाराष्ट्र में 103, उड़ीसा में 45 और राजस्थान में 32 बाघ होने का आकलन किया गया है.

इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बाघों की कम होती संख्या पर चिंता प्रकट की थी और कहा था कि कि जंगलों पर जनसंख्या का दबाव कम करने के प्रयास किए जाएँ.

इसके बाद बाघों की रक्षा के लिए भारत सरकार ने एक कार्यदल का गठन किया था और पर्यावरणविद् सुनीता नारायण को उसका प्रमुख बनाया गया था.

अवैध शिकार और घटते जंगलों को इसका सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में संरक्षण के उपायों के बावजूद बाघों की संख्या लगातार घट रही है.

माना जा रहा है कि

उल्लेखनीय है कि विश्व के 40 प्रतिशत बाघ भारत में रहते हैं.


.........................D.P.Mishra










Jan 04, '09



INDIA's U.P. IN WEST PARK DUDHAWA 







Jan 01, '09



All Friends,
WISH YOU HAPPY NEW YEAR 2009
May the coming year of 2009 
also mark the beginning of Peace, Prosperity, Love, Happiness, Bright Futures and Warmest Wishes. 
D.P.Mishra



Tags: friends





Dec 29, '08



दुधवा टाईगर रिजर्व के तहत कतर्नियाघट वन्यजीव प्रभाग के समीपवर्ती नार्थ खीरी वन प्रभाग के जंगल मे शावको के साथ डेरा जमाए एक बाघिन ने अपने बच्चो पर खतरा देखकर एक युवा तेदुआ से भिड़ गई. इस द्वंदयुद्ध में कमजोर पढे तेदुआ को मौत के घाट उतार दिया. इस तरह खीरी में एक तेदुआ की असमय मौत हों गई. जिसे वाइल्ड लाईफ के लिए अपूरणीय छ्ती माना जा रहा है. इससे पहले बिगत माह घायल तेदुआ की लखनऊ ले जाते समय मौत हों गई थी. जबकि माह मई में आदमखोर हुए तेदुआ को ग्रामीणों ने खेत में जिंदा जला दिया था. इस तरह सन् 2008 में तीन तेदुओ की हुई असमय मौतों ने यहाँ वन्यजीवों की सुरछा के लिए चल र्ही योजनाओं को करारा झट्का पहुचाया है. ............................................ डीपी मिश्र









Dec 04, '08






Tags: dpmishra





Dec 04, '08