तू फलक है तो मेरी मंज़िल का पता दे मुज को
तू चाँद है तो किसी रोज़ मेरी राहों मैं उतेर
तू धूप है तो सर्द मौसम से पाना दे मुझ को
तू आबर है तो किसी रोज़ दिल के सेहराऊ मैं उतेर
तू सफ़र है तो मेरी सारी उमेर यू ही सफ़र मैं गुज़रे
तू साबेर है तो किसी रोज़ मेरी सज़ाओ मैं उतेर
तू मुस्कुराहट हैं तो मेरे मासूम चेहरे पे चमक
तू खुशी हैं तो कभी मेरी ज़िंदगी मैं उतेर