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FRIENDLY-AADI's Scraps
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Scraps [ 5976 ]


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by Valley_of_Roses
खुशियों से भरा रहे सदा,
आपका ये प्यारा सा जीवन,
दूर रहे आपके जीवन से,
ये निगोड़े दु:ख के हर पल,
बस यही दुआ मांगती हूँ मैं,
हर पल ईश्वर से अपने...
'सुप्रभात'
                          



Posted on: June 18, '18



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Posted on: June 14, '18



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by Valley_of_Roses
My strong believe...
"Que sera, sera.Whatever will be, will be; The futur's not ours to see,Que sera, sera,What will be, will be"(One of my fvrts)
Have a cool cool evening ahead.
Regards & tc!!!



Posted on: June 12, '18



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by Valley_of_Roses
कल रात अपने खवाब में
देखा मैने अपने वजूद को,
धर पाख़ी का रूप,
अपने सोए हुए सुनहरे,
अरमानो के पंख लिए,
आज़ादी से उन्हें फैलाए,
उड़ती रहीं, कभी आस्मा में,
कभी हरे, हरे पत्तों से,
भरी उँचीं पेड़ की डाल पर,
हवा से भी हल्के मेरे अरमानो
कैसे समझायूं तुम्हें,
कैसे बतायूं तुम्हें,
ले चलो तुम मुझे,
सूरज की सुनहरी
किरणों के उस पार,
पहाड़ की उँची शृंखला,
के भी उस पार
नादिया के उस पार,
धीरे धीरे फिर आँख खुली
कर्ण में मेरे, सुनाईं से पड़े
कुछ बुदबुदाते हुए अनकहे शब्द,
'ले चलो मुझे...ले चलो मुझे'
(Kuch ankahe



Posted on: June 11, '18



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by idont_hit_ipunch
a painless pnnch for u



Posted on: June 10, '18



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Posted on: June 03, '18



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by Valley_of_Roses
Shubh Ratri....
"Aapse door hum kahin ja hi nahin sakte, apne ashkoan ko aur ansuaon ko, kisi ko dikha nahin sakte. Bichude to hein hum abhi kal parsoan, par lagta hein jaise sadian, hi beet gayin tere intezar mein."

Posted on: May 05, '08 By Me_MeetaCAP from New Delhi, India



Posted on: May 30, '18



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by sam_sensitive
लफ़्ज जब दिल से निकलते हैं, ग़ज़ल होती है,
जब भी दो दिल कहीँ मिलते हैं, ग़ज़ल होती है।

जलने के इरादे से, जब शमा की ज़ानिब,
लाखों परवानें निकलते हैं, ग़ज़ल होती है।

लहज़े में नज़ाकत हो, हमराह जब कभी,
हाथ में हाथ दे चलते हैं, ग़ज़ल होती है।

जज़्बात की आँधी को सीनें में दबाकर,
जब भी दीवानें मचलतें हैं, ग़ज़ल होती है।



Posted on: May 30, '18



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by sweetkitoo
वक्त दे आवाज जब भी, देख लो,
अनसुना जो कर दिया, पछताओगे,
जिंदगी को ठीक से पहचान लो,
कह रहा हूँ, आदमी बन जाओगे।

बोझ सहने की जिसे आदत न हो,
क्या सहेगा जिंदगी के भार को,
खेलता जो जिंदगी को खेल सा,
उसका ही जीवन यहाँ साकार हो।



Posted on: May 30, '18



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by monali2596
है मुफ़लिसी का दौर पर हिम्मत तो देखिए,
इस शायर-ए-फनकार की मोहब्बत तो देखिए।

बिन पंख के ही उड़ने को बेताब किस कदर,
नादान परिंदे की हसरत तो देखिए।

सूखे में किसानों का जीना मोहाल था,
अब बाढ़ है, खुदाई रहमत तो देखिए।



Posted on: May 30, '18





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