by virendrachouhan
दोस्ती एक पवित्र रिश्ता है
इस में न कोई छल-कपट, न निंदा है
मुझे दोस्ती पर है गर्व
दुनिया को यही बना सकती है स्वर्ग
दोस्ती मैं नहीं कुछ ज्यादा न कम,
खुलकर बांटे है, खुशियाँ और ग़म ,
दोस्तों के संग हम होते हैं हम
साथ रहेंगे जब तक है दम
दोस्तों की जीवन मैं एहमियत वो होती है
घोर अंधेरे मैं जो लौ की होती है
सब के दिल मैं होता है एक कोना
दोस्तों बगैर जो रह जाए सूना
दोस्ती मैं नही होती कोई दिवार
न उमर न मजहब की दरार
दिल यही चाहता है बार-बार
हर जनम मैं रहे संग बनके दोस्त यार ...